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क्या है देवउठनी एकादशी? विवाह और मांगलिक कार्यों का शुभारंभ का पर्व

 देवउठनी एकादशी: विवाह और मांगलिक कार्यों का शुभारंभ का पर्व:

देवउठनी एकादशी का व्रत 12 नवंबर को रखा जाएगा, पारण (उपवास तोड़ना) 13 नवंबर को सुबह 6:42 से 8:51 बजे के बीच किया जाएगा।

हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी (जिसे देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है) का विशेष महत्व है। यह एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है और भगवान विष्णु के चार महीने के योगनिद्रा से जागने का पर्व माना जाता है। इस दिन से ही मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, आदि की शुरुआत होती है।


क्या है देवउठनी एकादशी का महत्व?

पौराणिक परंपराओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (हरिशयनी एकादशी) के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निंद्रा में समाहित हो जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। इस समय सभी शुभ कार्य निलंबित कर दिए जाते हैं। फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं, जिसे देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के जागते ही सभी देवताओं के कार्य सक्रिय हो जाते हैं, और धरती पर एक नई ऊर्जा का संचार होता है।

भगवान विष्णु

विवाह और मांगलिक कार्यों की शुरुआत:

देवउठनी एकादशी को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। विशेष रूप से विवाह के लिए इसे बेहद पवित्र दिन माना गया है। इस दिन से लेकर अगले चार महीनों तक हिन्दू समाज में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त माने जाते हैं। यही कारण है कि कई जगहों पर इस दिन को तुलसी विवाह के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें भगवान विष्णु और तुलसी के प्रतीकात्मक विवाह की परंपरा निभाई जाती है।


कैसे करें देवउठनी एकादशी का व्रत और पूजा विधि:

देवउठनी एकादशी का व्रत करने वाले भक्त इस दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। व्रत के दौरान दिनभर भगवान विष्णु के भजन और कथा का श्रवण किया जाता है। रात्रि जागरण का भी महत्व है, जिसमें भक्त भगवान का ध्यान करते हुए जागते हैं। पूजा में शंख, तुलसी, धूप, दीप, और पुष्पों का उपयोग किया जाता है।


तुलसी विवाह का महत्व:

तुलसी विवाह

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह की परंपरा निभाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने राक्षस जालंधर का वध करने के लिए तुलसी को वरदान दिया और उनसे विवाह किया। इस दिन तुलसी के पौधे को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। यह विवाह समारोह भी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

देवउठनी एकादशी का वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलू:

देवउठनी एकादशी का पर्व सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से जोड़ता है। कार्तिक माह में मौसम ठंडा होने लगता है, और चातुर्मास के समाप्त होते ही शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यों की शुरुआत होती है।


देवउठनी एकादशी एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व हमें भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर देता है, साथ ही यह शुभ कार्यों के आरंभ का संकेत है।


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